शैक्षणिक

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के.उ.ति.शि.सं.की स्थापना विशेष रूप से प्रवासी तिब्बतियों एवं हिमालयी क्षेत्र के भारतीय छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के लिए की गई है । संस्थान में शोध समर्पित पाँच विभागों के साथ, पाँच शैक्षणिक संकाय है जिसमे कुल तेरह विभाग हैं। संस्थान की पाठ्यक्रम संरचना का मूल आधार दर्शन संकाय है, जिसमें तिब्बती बौद्ध धर्म की प्रमुख परंपराओं- ञिङमा, कर्ग्युद, शाक्य, गेलुग और बोन के साथ-साथ भारतीय बौद्ध दर्शन भी शामिल है ।
शब्दविद्या संकाय में तिब्बती, संस्कृत, पालि, हिंदी और अंग्रेजी जैसी विभिन्न भाषाएँ पढ़ाई जाती हैं। इस संकाय में शिक्षक शिक्षण केंद्र भी है, जहां छात्रों को भारत के विभिन्न स्कूलों में शिक्षा देने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। आधुनिक विद्या संकाय के अन्तर्गत एशियाई इतिहास, तिब्बती इतिहास, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र पढ़ाया जाता है। शिल्पविद्या संकाय में पारंपरिक तिब्बती चित्रकला और काष्ठकला के विभागों का कार्य विषय सम्बंधित ज्ञान का प्रबंधन देखना है। सोवा-रिग्पा संकाय में दो विभाग समाहित हैं, जो तिब्बती चिकित्सा विज्ञान के साथ-साथ तिब्बती ज्योतिष शास्त्र के शिक्षण प्रशिक्षण की भी व्यवस्था करना है ।

नालन्दा की प्राचीन परंपरा को संस्थान ने संरक्षित एवं संवर्धित करते हुए वार्षिक कंठस्थ परीक्षा तथा नालन्दा शैली की शास्त्रार्थ-कला को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है । संस्थान ऐसी शिक्षा प्रदान करना चाहता है जो छात्रों को समय के सापेक्ष में चुनौतियों और अवसरों दोनों के लिए तैयार करे । पारंपरिक ज्ञान और मूल्यों की निरंतरता को विकसित करते हुए, पाठ्यक्रम में नैतिकता और मूल्य दोनों की पारंपरिक विधाओं को अपनाया गया है। दो अधिसत्र आधारित परीक्षा-प्रणालीशास्त्रार्थ की परंपरा के साथ-साथ अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान जैसे आधुनिक विषय और बी.ए.बी.एड. शामिल हैं। पाठ्यक्रम और कार्यक्रम के प्रारूप अच्छी तरह से संरचित किए गए हैं। संस्थान नियमित रूप से छात्रों एवं संकाय सदस्यों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, शिविर, सम्मेलन और संगोष्ठियाँ आयोजित करता रहता है।

संस्थान की स्थापना के प्रारम्भिक काल से ही आदरणीय क्याबजे ज़ोंग रिनपोछे, क्याबजे समदोंग रिनपोछे, आचार्य लोबसंग नोर्बू शास्त्री, आचार्य नवांग समतेन तथा वर्तमान आचार्य वङ्छुग दोर्जे नेगी जैसे निदेशकों और कुलपतियों की समृद्ध नेतृत्व शृंखला रही है।

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